21वीं
सदी की सबसे बड़ी
चुनौतियों में से एक है—तेज़ रफ़्तार जीवनशैली और उससे जुड़ी
स्वास्थ्य समस्याएँ। पहले जहाँ लोग खेतों, फैक्टरियों या मेहनत वाले
काम में लगे रहते थे, वहीं अब अधिकतर काम
दफ्तर और डिजिटल उपकरणों
पर निर्भर हो गए हैं।
लंबे समय तक कुर्सी पर
बैठना, स्क्रीन पर नज़रें गड़ाए
रखना और बाहर का
तला-भुना खाना खाना—इन सबने जीवन
को अस्वस्थ बना दिया है।
इसी
पृष्ठभूमि में फिटनेस अब केवल एक
शौक़ नहीं, बल्कि जीवन की ज़रूरी ज़िम्मेदारी
बन चुकी है। भारत जैसे देश में जहाँ युवाओं की संख्या सबसे
अधिक है, फिटनेस का बढ़ता चलन
न सिर्फ़ स्वास्थ्य से जुड़ा है,
बल्कि यह एक उद्योग
और अर्थव्यवस्था का हिस्सा भी
बन गया है।
बदलती
जीवनशैली और फिटनेस की
आवश्यकता
पिछले
बीस वर्षों में भारतीय समाज में अभूतपूर्व बदलाव हुए हैं।
पहले
लोग पैदल चलना, खेतों में काम करना, साइकिल से सफर करना
और शारीरिक श्रम पर ज़्यादा ध्यान
देते थे।
आज
कार, बाइक और मेट्रो ने
चलने-फिरने की आदतें कम
कर दी हैं।
ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स ने खाना बनाने और हेल्दी डाइट की जगह तली-भुनी चीज़ों का चलन बढ़ा दिया है।
इन
बदलावों के कारण भारत
में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों
(Lifestyle Diseases) जैसे—डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर, मोटापा और हार्ट अटैक—के मामले तेज़ी
से बढ़े हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत
में हर साल 55% मौतें
इन बीमारियों की वजह से
होती हैं।
इन्हीं
कारणों से फिटनेस अब
“लक्ज़री” नहीं रही, बल्कि यह “जीवन रक्षा का तरीका” बन
गई है।
भारत में फिटनेस इंडस्ट्री का विस्तार
भारत में फिटनेस सेक्टर ने बीते दशक में जबरदस्त प्रगति की है।
Statista की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की फिटनेस इंडस्ट्री 2022 में लगभग 6 बिलियन डॉलर की थी और 2025 तक इसके 12 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
देशभर में 25,000 से अधिक जिम और लाखों छोटे-बड़े योगा एवं फिटनेस सेंटर सक्रिय हैं।
महामारी के बाद ऑनलाइन फिटनेस ऐप्स और डिजिटल ट्रेनिंग में तेज़ उछाल आया है।
आज
स्थिति यह है कि
लोग अपनी कमाई का एक बड़ा
हिस्सा स्वास्थ्य और फिटनेस पर
खर्च करने लगे हैं।
युवाओं
में फिटनेस का क्रेज़
भारत में 65% आबादी 35 साल से कम उम्र की है। यह युवा पीढ़ी सोशल मीडिया, फिल्मों और खेल हस्तियों से प्रेरणा लेकर फिटनेस को प्राथमिकता दे रही है।
18–35 आयु वर्ग के लोग जिम जाने वालों की सबसे बड़ी संख्या हैं।
सोशल मीडिया पर फिटनेस ट्रेनिंग वीडियो, जिम सेल्फी और वर्कआउट स्टोरीज़ युवाओं की नई पहचान बन चुकी हैं।
बॉडीबिल्डिंग
प्रतियोगिताएँ और रनिंग मैराथन
अब सिर्फ़ खेल नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल बन गए हैं।
उदाहरण:
विराट कोहली का फिटनेस रूटीन
आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा
है। कोहली ने दिखाया कि
फिटनेस केवल एथलीट के लिए नहीं,
बल्कि हर इंसान के
लिए जरूरी है।
महिलाओं
की फिटनेस जागरूकता
- महिलाओं में फिटनेस की जागरूकता पिछले 10–12 वर्षों में काफी बढ़ी है।
- पहले महिलाएँ फिटनेस को केवल वजन घटाने तक सीमित समझती थीं।
- अब महिलाएँ योगा, पिलेट्स, ज़ुम्बा, क्रॉसफ़िट और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी अपना रही हैं।
- शहरों में जिम जाने वाली महिलाओं की संख्या लगभग 35% तक पहुँच चुकी है।
इसके
अलावा, गर्भवती और नई माताओं
के लिए विशेष फिटनेस प्रोग्राम भी चल रहे
हैं, जो उनकी और
बच्चे की सेहत के
लिए बेहद फायदेमंद हैं।
फिटनेस
और मानसिक स्वास्थ्य
- फिटनेस का असर केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि दिमाग पर भी पड़ता है।
- योग और मेडिटेशन को तनाव, अवसाद और चिंता से लड़ने का सबसे असरदार तरीका माना गया है।
- ऑफिस कर्मचारियों के लिए फिटनेस गतिविधियाँ ‘बर्नआउट’ से बचने में मदद करती हैं।
WHO की
रिपोर्ट के अनुसार, जो
लोग हफ़्ते में कम से कम
150 मिनट व्यायाम करते हैं, उनमें अवसाद का खतरा 30% कम
होता है।
ग्रामीण भारत और फिटनेस
- शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में फिटनेस का स्वरूप अलग है।
- गाँवों में पारंपरिक खेल—कबड्डी, कुश्ती, खो-खो—प्राकृतिक व्यायाम का रूप रहे हैं।
- हालाँकि, बदलती परिस्थितियों में खेती पर निर्भरता घट रही है और युवाओं में आलस्य बढ़ रहा है।
- सरकार और गैर-सरकारी संगठन अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और योग शिविर आयोजित कर रहे हैं।
“फिट
इंडिया मूवमेंट” का सबसे बड़ा
लक्ष्य यही है कि गाँव
से लेकर शहर तक फिटनेस की
संस्कृति को सामान्य जीवन
का हिस्सा बनाया जाए।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और फिटनेस
- महामारी के दौरान जब जिम बंद हो गए, तब डिजिटल फिटनेस की शुरुआत हुई।
- Cure.fit, HealthifyMe, Fittr जैसे ऐप्स ने लाखों लोगों को ऑनलाइन वर्कआउट की सुविधा दी।
- वर्चुअल क्लासेस, लाइव ट्रेनिंग और डाइट चार्ट अब मोबाइल से ही उपलब्ध हैं।
स्मार्टवॉच
और फिटनेस बैंड्स ने हर कदम,
दिल की धड़कन और
नींद की गुणवत्ता को
मापना आसान कर दिया है।
फिटनेस इंडस्ट्री और रोजगार
- फिटनेस केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि रोज़गार का भी बड़ा साधन है।
- भारत में लगभग 50 लाख लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से फिटनेस इंडस्ट्री से जुड़े हैं।
- जिम ट्रेनर, योगा इंस्ट्रक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट, स्पोर्ट्स कोच और फिज़ियोथेरेपिस्ट की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
- हेल्दी फूड मार्केट और सप्लीमेंट कंपनियाँ भी करोड़ों रुपये का कारोबार कर रही हैं।
चुनौतियाँ
फिटनेस इंडस्ट्री की रफ़्तार तेज़ है, लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं:
1. सही
जानकारी का अभाव – कई
लोग फिटनेस में गलत डाइट या स्टेरॉयड का
सहारा ले रहे हैं।
2. आर्थिक
असमानता – बड़े शहरों में फिटनेस सुविधाएँ हैं, पर छोटे शहर
और गाँव अब भी पीछे
हैं।
3. समय
की कमी – नौकरीपेशा लोग वर्कआउट के लिए समय
नहीं निकाल पाते।
4. सप्लीमेंट्स
का बाज़ार – नकली और घटिया सप्लीमेंट्स
युवाओं की सेहत बिगाड़
रहे हैं।
सरकार और फिटनेस अभियान
- भारत सरकार ने फिटनेस को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के लिए कई पहल की हैं:
- फिट इंडिया मूवमेंट (2019) – “फिटनेस की डोज़, आधा घंटा रोज़” इसका नारा है।
- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) – पूरी दुनिया में योग को भारत ने नई पहचान दिलाई।
- खेलो इंडिया योजना – युवाओं में खेल और फिटनेस को बढ़ावा देने की एक बड़ी पहल।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
- भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में फिटनेस अब एक अरबों डॉलर का उद्योग है
- वहाँ फिटनेस को जीवनशैली का हिस्सा माना जाता है, जबकि भारत में अब यह धीरे-धीरे ट्रेंड बन रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग भारत का सबसे बड़ा योगदान है, जिसे 180 से अधिक देशों में अपनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
फिटनेस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि –
- नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से 70% बीमारियों से बचाव संभव है।
- बच्चों को बचपन से ही खेल और योग से जोड़ना चाहिए।
- फिटनेस केवल “जिम” तक सीमित नहीं, बल्कि यह पूरी जीवनशैली में संतुलन का नाम है।
भविष्य की तस्वीर
- भारत में फिटनेस का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।
- टेक्नोलॉजी आधारित फिटनेस (AI, VR वर्कआउट, स्मार्ट जिम मशीनें) आने वाले समय में आम होंगी।
- हेल्दी फूड मार्केट, ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स और न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स का कारोबार तेज़ी से बढ़ेगा।
- फिटनेस को स्कूलों और दफ्तरों की दिनचर्या में शामिल करना भविष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
निष्कर्ष
फिटनेस अब कोई फैशन नहीं रहा, बल्कि यह आधुनिक जीवन की आवश्यकता बन चुका है। भारत की युवा आबादी अगर फिट और स्वस्थ रहती है, तो देश की अर्थव्यवस्था, उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मज़बूत होगी।
सरकार,
उद्योग और समाज—तीनों
मिलकर अगर फिटनेस को रोज़मर्रा की
आदत बना दें, तो भारत न
सिर्फ़ बीमारियों से बचेगा, बल्कि
दुनिया का सबसे युवा
और सबसे फिट राष्ट्र बनकर उभरेगा।
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